चाॅंद न बन जाए सूरज !

May Ray Day ( 19 May) Special

अगर अंतरिक्ष वैज्ञानिकों की मानें तो हमारे सौरमंडल का सरताज सूरज धीरे-धीरे अपना तेज खो रहा है. न केवल इसका मैग्नेटिक फील्ड यानी चुंबकीय क्षेत्र भी पहले की तुलना में कमजोर हुआ हुआ है, बल्कि सूरज की सतह पर होने वाली घटनाओं मेंबेतहाशा कमी देखने में आ रही है. ज्ञातव्य है कि सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र गर्म हवाओं और काॅस्मिक रेज को प्रभावित करता है.
विज्ञान के शब्दों में इस स्थिति को सोलर मिनिमम कहा जाता है. वैज्ञानिकों की चिंता यह है कि इसकी वजह से पृथ्वी सूर्य की किरणों में कमी आने से वातावरण में कई तरह के बदलाव देखने को मिल सकते हैं और इसका पृथ्वी के मौसम व जलवायु पर काफी प्रतिकूल असर पड़ सकता है.

ऐसी स्थिति 18 वीं सदी के अंतिम दशक में भी देखी गई थी, जो अगले करीब चार दशकों तक बनी रही थी. इस दौरान तापमान में अप्रत्याशित कमी आई, जिससे यूरोप में अनेक नदियां जमने, फसलें बर्बाद होने और धरती के कई हिस्सों में भूकंप-सूखा जैसे परिणाम सामने आए थे. इसे डाल्टन मिनिमम का नाम दिया गया था. नासा के वैज्ञानिकों ने आशंका जताई है कि पृथ्वाी को फिर से डाल्टन मिनिमम जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है, जो पहले के मुकाबले काफी ज्यादा विनाशकारी हो सकती है.
हालांकि, रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी के वैज्ञानिकों ने यह भी कहा है कि यह एक कुदरती चक्र है, जिसमें सूर्य की सतह पर हर 11 साल में ऐसी घटनाएं देखने को मिलती हैं, इसलिए इससे घबराने की जरूरत नहीं है और कुछ दिनों में सूर्य का चुंबकीय क्षेत्र अपने पुराने रूप में आ जाएगा.
लेकिन, जर्मनी के मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का दावा इसके विपरीत है, जिसके मुताबिक पृथ्वी को ऊर्जा देने वाला सूरज आकाशगंगा में मौजूद अन्य तारों की तुलना में कमजोर पड़ गया है, जिससे इसके प्रकाश में कमी आई है. तारों की उम्र, चमक और रोटेशन के आधार पर किए गए अध्ययन और नासा के केपलर स्पेस टेलीस्कोप से मिले आकंड़ों के निष्कर्षों के आधार पर इन वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछली नौ सहस्त्राब्दियों में सूर्य की चमक में 5 गुना कमी आई है. यह नौ हजार सालों से हो रहा है कि हमारा सूरज लगातार कमजोर होते जा रहा है और इसकी चमक दिनो दिन फीकी पड़ती जा रही है.?
इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों का कहना है कि 1610 से सूरज पर बनने वाले सोलर स्पॉट लगातार कम होते जा रहे हैं पिछले साल भी करीब 246 दिन तक सूरज पर एक भी स्पॉट बनते नहीं देखा गया. सूरज के केंद्र से जब गर्मी की तेज लहर ऊपर उठती है तो सोलर स्पॉट बनते हैं. नए सोलर स्पॉट न बनने का मतलब यह निकाला जा रहा है कि सूरज अन्य तारों की तुलना में कमजोर हुआ है.

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