31 को होगा स्टैच्यू आॅफ लिबर्टी का लोकार्पण

अमेरिका के स्टैच्यू आॅफ लिबर्टी की तर्ज पर, भारत में भी ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी‘ का पाँच साल पुराना सपना साकार होने जा रहा है. आज से ठीक एक सप्ताह बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल को समर्पित दुनिया के सबसे बड़े इस ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी‘ का लोकार्पण उनके जन्म दिवस 31 अक्टूबर को करेंगे.

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2013 में आरंभ, ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी‘ की ऊंचाई 182 मीटर है जो सरदार सरोवर बांध के तीन किलोमीटर अंदर की ओर बनाई जा रही है. पूरी तरह से लोहे की बनी लौह पुरुष की इस प्रतिमा के निर्माण के लिए लोहा, देश भर से किसानों-मजदूरों से एकत्रित किया गया है. इसके निर्माण पर करीब 2,989 करोड़ रुपये लागत का अनुमान है. इसमें प्रतिमा के अलावा मेमोरियल, गार्डेन और श्रेष्ठ भारत भवन नाम से एक कन्वेंशन सेंटर का निर्माण प्रस्तावित है.

हांलाकि, एक ओर जहाँ इसे राष्ट्र के गौरव से जोड़कर देखा जा रहा है, वहीं इसका विरोध भी काफी हो रहा है. प्रतिमा निर्माण से प्रभावित आदिवासियों ने असहयोग आंदोलन की घोषणा की है, जिसे 100 छोटे -बड़े आदिवासी संगठन समर्थन दे रहे हैं. जिन आदिवासियों की जमीन सरदार सरोवर नर्मदा परियोजना के साथ मूर्ति और अन्य सभी पर्यटन गतिविधियों के लिए ले ली गई है, उनकी शिकायत है कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी प्रोजेक्ट की वजह से प्रभावित हुए 72 गांवों में से 32 गांव सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. इनमें से 19 गांवों में तथाकथित रूप से पुनर्वास नहीं हुआ है और न ही अभी तक जमीन और नौकरी जैसे वादों को पूरा किया गया है. आंदोलनकारियों का कहना है कि उत्तरी गुजरात के बनासकांठा से लेकर दक्षिण गुजरात के नौ आदिवासी जिले के लोग हमारे विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे और ‘ये बंद स्कूल, ऑफिस या वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि 31 अक्टूबर को किसी भी घर में खाना नहीं पकेगा.

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