सेक्स से सेहत

एक पार्टिकुलर एज के बाद सेक्स में इंसान का इंटरेस्ट कम हो जाता है यह एक नेचुरल सी बात है. लेकिन, सोशल साइंटिस्ट्स की चिंता यह है कि अब यह पार्टिकुलर एज बहुत जल्दी आने लगी है. लोग, 35-40 की एज तक में सेक्स से उदासीन होने लगे हैं.


हेल्थ एक्सपर्ट्स इस घटते रुझान से और भी परेशान हैं. उनका मानना है कि इससे हम अपनी सेहत को खतरे में डाल रहे हैं. एक रीसेंट स्टडी में स्कॉटलैंड की विलकेस बेर यूनिवर्सिटी के रिसचर्स ने सेक्स छोड़ने से सामने आने वाले खतरों के प्रति आगाह करते हुए दावा किया है कि सेक्स हमें स्ट्रेस और डिप्रेसन से बचाता है.

स्टडी के अकाॅर्डिंग,जो लोग 2 हफ्ते में एक बार जरूर सेक्स करते हैं वो दूसरों के मुकाबले डिप्रेसन की चपेट में कम आते हैं, जिसकी वजह सेक्स के दौरान ब्रेन से रिलीज होने वाले, एंडोर्फिन और ऑक्सीटोसिन नाम के हार्मोन हैं, जो हमें फील गुड कराते हैं.

स्टडी आगाह करती है कि है कि जो मेल अपनी सेक्स ड्राइव पर विराम लगा देते हैं, उनमें प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है, वहीं इसके अपोजिट रेगुलर सेक्स करने वालों में इसका रिस्क 20 फीसदी कम हो जाता है.
सेक्स से दूर रहने से हमारा इम्यून सिस्टम भी कमजोर हो जाता है, जबकि  वीक में एक से दो बार सेक्स करने से बाॅडी में इम्यूनोग्लोब्युलिन का लेवल करीब 30 पर्सेंट तक ग्रो करता है जो कई तरह की बीमारियों से बचाता है.

जर्नल आर्काइव ऑफ सेक्सुअल बिहेवियर में पब्लिश्ड एक रिपोर्ट के अकाॅर्डिंग, सेक्स की कमी फीमेल्स को भी डिप्रेशन के काफी करीब ले आती है. क्योंकि स्पर्म में पाए जाने वाले मेलाटोनिन, सेरोटोनिन और ऑक्सीटोसिन जैसे तत्व, उनके मूड को बेहतर रखने में हेल्प करते हैं.

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