सोशल बाॅन्ड

सेवेंटीज में ओशो की बुक संभोग से समाधि ने न सिर्फ अपने टाइटिल, बल्कि एक कंट्रोवर्सियल फिलाॅसफिकल डिबेट को ओरिजिनेट कर पूरी दुनिया में काफी तहलका मचा दिया था. आज करीब चार दशकों बाद साइंस भी जिस तरह उन्हीं के सुर में सुर मिला रहा है, उसे देखते हुए दिवंगत लेखक खुशवंत सिंह की यह बात याद आना स्वाभाविक ही है कि ओशो एक ऐसे दार्शनिक हैं, जो समय से काफी पहले पैदा हो गए.

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अमेरिकी की ड्यूक यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों की एक टीम ने अपनी रिसर्च में दावा किया है कि सेक्स के दौरान जो हॉर्मोन रिलीज होता है, उससे स्प्रिच्युअलिज्म को बढ़ावा मिलता है और ईश्वर में हमारी आस्था मजबूत होती है. रिसर्च के अकाॅर्डिंग, सेक्स करते हुए ऑक्सिटॉसिन नाम के एक हॉर्मोन का स्राव होता है, जो न सिर्फ हमारे सोशल बाॅन्ड को स्ट्राॅन्ग करता है, बल्कि धर्म के प्रति हमारे लगाव को भी बढ़ाता है. इस रिसर्च के लिए की गई स्टडी में शोधकर्ताओं ने मिडिल एज ग्रुप के कुछ पार्टिसिपेंट्स में ऑक्सिटॉसिन के लेवल को बढ़ाया और पाया कि उनके अंदर आध्यात्म की भावना में काफी बढ़ोत्तरी हुई है, जिसका असर एक हफ्ते के बाद भी रहा.

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