संघर्ष से होकर जाती है सफलता की राह….

उसके  चेहरे पर ओज है, वाणी में जोश, आँखों में गजब का आत्मविश्वास और एक लंबे समय से चेहरे का अभिन्न अंग बन चुकी दाढ़ी में,अनेक अनसुलझे से राज… जी हाँ, हम बात कर रहे हैं, नागपुर के युवा अभिनेता व मॉडल  संग्रामसिंह ठाकुर की जो अब तक 45 से अधिक शॉर्ट्स फिल्म ( यूफोरिया, ताली, अनकट, नॉट फॉर सेल, राहें, एक सवाल आदि) व एड फिल्म्स और करीब बहुत सारे फोटो शूट्स का हिस्सा बन चुके हैं तथा हाल ही में अनेक फिल्म फेस्टिवल्स में सराहना पा चुकी हिंदी फिल्म राक्कोश में अपने अभिनय के जलवे दिखा चुके हैं. इसके अलावा उन्होंने ‘बेकार की बहस ‘और ‘दृष्टिभ्रम’ जैसी  वेब सीरीज में भी उल्लेखनीय भूमिकाएं निभाई हैं.  मराठी फिल्म प्रेम एक टाइम पास उनकी आने वाली फिल्मों में से एक है.

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डीएनसी कॉलेज के स्टुडेंट रहे संग्राम ने , जिन्हें थिएटर का काफी वर्षों का अनुभव है, उन्होंने शुरू में नहीं सोचा था कि उन्हें अभिनय में जाना है. उनका पूरा रूझान मॉडलिंग की ओर था. उसी दौरान कॉलेज में विनोद जगाते एक प्ले कर रहे थे, जिसमें संग्राम को पुजारी की भूमिका ऑफर की गई. इस भूमिका में उन्हें काफी सराहा गया और इसी के साथ उनके एक्टिंग कैरियर का आगाज हुआ और वे थिएटर करने लगे.

2012 में, इसके बाद उनके एक पड़ोसी दोस्त के माध्यम से उन्हें हर्षद सालपे से मिलने का मौका मिला, जो उन दिनों ‘खुशियों का पता’ नाम की एक शॉर्ट् फिल्म बना रहे थे, जिसमें संग्राम को एक छोटा सा रोल करने को मिला. लेकिन, पहली बार कैमरे का सामना करते ही उन्हें लग गया कि यही वह राह है, जिस पर उन्हें आगे बढ़ना है… और फिर ऑनस्क्रीन एक्टिंग के उनके नए सफर की शुरूआत हो गई. संघर्ष और तरह-तरह के अनुभवों से गुजरते हुए संग्राम की प्रतिभा को नई धार मिली. इसे और तेज करने के उन्होंने  रा.सं.तुकड़ोजी महाराज विश्वविद्यालय से अभिनय में छह माह का सर्टिफिकेट कोर्स किया इसके अलावा वे एनएसडी के एक माह के ट्रेनिंग कैंप में भी हिस्सा ले चुके हैं.

नौ साल के अनुभव के बावजूद, संग्राम को अपनी वरिष्ठता पर कोई अभिमान नहीं है. वे आज भी किसी भी ऑडिशन की खबर मिलने पर उसमें जरूर हिस्सा लेते हैं. और उन्होंने नागपुर के कलाकारों के साथ एक ग्रुप बनाया है, जो ऐसे किसी ऑडिशन में हिस्सा नहीं लेता, जिसमें ऑडिशन के नाम पर आर्टिस्ट्स से गलत तरीके से पैसों की उगाही की जाती है. इसके लिए बाकयदा एक लंबी मुहिम चलाई गई. इससे नागपुर में पेड ऑडिशन का ट्रेंड करीब-करीब खत्म ही हो गया. इसे संग्राम अपने कैरियर की उपलब्धि मानते हैं. इसके अलावा वह खाली समय में एक्टिंग के शौकीन युवक-युवतियों का अभिनय की ट्रेनिंग भी देते हैं और उन्हें यह जरूर सिखाते हैं कि वे ऑडिशन कैसे फेस करें, ताकि उन्हें उन दिक्कतों का सामना करना पड़े, जो संग्राम को मार्गदर्शन के अभाव में शुरूआती दौर में झेलनी पड़ी थीं.

बतौर एक्टर, संग्राम किस तरह की भूमिका को निभाने का सपना देखते हैं? इस बारे में पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि अभी तक उन्होंने इस बारे में कभी नहीं सोचा कि उनका ड्रीम रोल क्या होगा. लीड रोल के बारे में उनका यह कहना है कि मैं कभी लीड रोल के पीछे नहीं भागता, क्योंकि मुझे पता है कि एक बार लीड रोल करने के बाद, लोग आपको सपोर्टिंग या छोटी भूमिकाओं के लिए अप्रोच करने में झिझकते हैं. इसलिए मैं अभी सह-भूमिकाओं को प्राथमिमता देता हूँ, जिससे ज्यादा से ज्यादा काम कर सकूँ.

थिएटर और स्क्रीन, दोनों को समान रूप से महत्वपूर्ण मानने वाले संग्राम निजी तौर पर स्क्रीन रोल को ज्यादा प्राथमिकता देते हैं, क्योंकि इसमें कलाकार को एक मास ऑडिएंस मिलती है और उसकी प्रतिभा बहुत कम वक्त में हजारों लोगों तक पहुँच जाती है. अपने कैरियर को इस मकाम तक पहुँचाने में संग्राम शॉर्ट्स फिल्मों का एक बड़ा योगदान मानते हैं, उनका कहना है कि बतौर एक एक्टर उन्हें जो पहचान मिली है, उसमें सबसे ज्यादा योगदान शॉर्ट्स फिल्म का ही है. लेकिन, हर कलाकार की तरह बड़ा पर्दा संग्राम की भी मंजिल है और वे इसके लिए काफी मेहनत कर रहे हैं.उनके संघर्ष में उन्हें अपने दोस्तों और परिवारजनों का पूरा साथ मिला है, लेकिन सबसे ज्यादा सहयोग है उनकी पत्नी शिल्पा अडकिने ठाकुर और उनके छोटे भाई नंदराज सिंह ठाकुर का. शिल्पा ने चित्रकला महाविद्यालय से बीएफए इन एप्लाइड आर्ट किया है और कला की क्लासेज लेती हैं वहीं नंदराज एक ड्रेस डिजाइनर व कोरियोग्राफर हैं और रक्कोश फिल्म के परिधान सहायक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

जिंदगी नेक्स्ट टीम संग्राम के प्रयासों की सराहना करते हुए आशा और कामना करती है कि उनका संघर्ष रंग लाए और उन्हें वह मुकाम हासिल हो, जिसका वह सपना देखते हैं.

#sangramsinghthakur

( Click here to watch Sangram Singh in his solo performance for the movie ‘Saajish’ ) 

By Sandeep K. Agrawal from Nagpur (M.S.)

 

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