85% कम होगा एचएफसी जेनरेशन

दुनिया के 197 देशों ने इस बात पर सहमति जाहिर की है कि वे चरणबद्ध तरीके से कार्बन डाईऑक्साइड से सैंकड़ो गुना ज्यादा घातक गैस हाइड्रो फ्लोरो क्लोराइड (एचएफसी) का इस्तेमाल खत्म करेंगे. इसके लिए बैठक में तीस साल पुराने माॅन्ट्रियल प्रोटोकाल में संशोधन कर एचएफसी को इसमें शामिल किया गया.

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कानूनी तौर पर मानने के लिए बाध्य डेवलप्ड कंट्री, डेवलपिंग कंट्रीज से पहले एचएफसी जेनरेशन और कन्जम्पशन रिड्यूस करने के प्रोग्राम इनिशिएट करेंगे और 2045 तक इसके उत्पादन में 85 फीसदी की कमी लाएंगे. अगर कम से कम बीस देश या इससे जुड़े पक्ष, इस करार को अप्रूव कर इसे यूएन को सौंप देते हैं तो यह 01 जनवरी 2019 से लागू हो जाएगा.

इसके अमल में आने के बाद यूरोपियन यूनियन मेंबर कंट्रीज और अमेरिका 2019 में एचएफसी के जेनेरेशन में दस फीसदी कटौती करेंगे और पांच साल बाद यानी 2024 से यह चीन, लैटिन अमेरिका और कई दूसरे देशों में लागू हो जाएगा. इसके बाद 2028 तक भारत, पाकिस्तान, ईरान, इराक और कई गल्फ कंट्रीज भी एचएफसी कटौती करने वाले देशों में शामिल हो जाएंगे.

एचएफसी

फ्रिज और एयरकंडीशनर जैसे कूलिंग एप्लाइंसेज में यूज होने वाली एचएफसी ने क्लोरोफ्लोरोकार्बन (सीएफसी) की जगह ली हुई है, जिसे अल्ट्रावायलेट किरणों से प्रोटेक्ट करने वाली ओजोन परत को तेजी से नष्ट करने वाली गैस माना गया. लेकिन, अब इस बात के काफी एविडेंस मिल चुके हैं कि एचएफसी भी धरती के टेम्प्रेचर को बढ़ा रही है.

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