हुआ खत्म इंतजार, नागपुरकर करेंगे राखोश का दीदार

कल्पना कीजिए उस शहर की, जिसका किसी फिल्म के निर्माण में तीन चौथाई से ज्यादा योगदार रहा हो, और उसे ही वह फिल्म देखने को न मिले…. जी हाँ, हम बात कर रहे हैं भारत की पहली पी.ओ.वी. फिल्म राखोश की, जिसमें न सिर्फ नागपुर के 50 से अधिक कलाकारों व दूसरी विधाओं के लोगों ने काम किया है, बल्कि उसकी पूरी शूटिंग भी नागपुर में हुई है.

Rakkosh

लेकिन, अब इंतजार की घड़ी समाप्त हो चुकी है, विभिन्न फिल्म समारोहों में धूम मचा चुकी राखोश, जिसे हाल ही मे राजस्थान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल (रिफफ) में बेस्ट डायरेक्टर (जूरी) अवार्ड से नवाजा गया है, रविवार 10 फरवरी को नागपुर के फेमस आॅरेंज सिटी इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में दिखाई जाएगी. राखोश एक ऐसी फिल्म है, जहां पर कैमरा ही हीरो है और सारे कलाकार कैमरे से ही बातें करते हैं. और इस कल्पनातीत दुरूह कार्य को संभव बनाया है, फ्रांसीसी सिनेमाटोग्राफर बेसिल पियरे ने.

मशहूर मराठी लेखक नारायण धड़प, जिनकी कहानी पर बनी थ्रिलर ‘तुम्बाड़‘ काफी चर्चा में है, की ही एक और कहानी ‘पेशेंट नंबर 302‘ पर बनी सायकॉलॉजिकल थ्रिलर फिल्म ‘राखोश‘ की कहानी पूरी तरह से एक मेन्टल एसाइलम में सेट की गयी है.

फिल्म के प्रोड्यूसर संतोष और सयाली देशपांडे हैं और डायरेक्टर अभिजीत कोकाटे व श्रीविनय सालियन तथा एडिटर दिनेश पुजारी हैं सयाली का कहना है कि जब उन्होंने राखोश के कहानी सुनी तो उन्होंने तभी जान लिया कि इस फिल्म को उन्हें जरूर प्रोड्यूस करना चाहिए.

फिल्म के क्रिएटिव प्रोड्यूसर प्रशेन क्यावल से जब यह पूछा गया कि इस फिल्म को बनाते हुए उन्हें किस प्रकार के क्रिएटिव चैलेंजेज फेस करने पड़े तो उनका कहना था कि यह इस तरह की फिल्म है, जिससे जुड़े हर क्रिएटिव शख्स को, चाहे वह स्क्रिप्ट राइटर हो, सिनेमाटोग्राफर हो, एडिटर हो या कोई और, खुद को ही विषय समझकर काम करना होता है. प्रशेन के मुताबिक उनके लिए, हर व्यक्ति को हर स्तर परयह बात समझा पाना एक बड़ा क्रिएटिव चैलेंज था.

राखोश में रविकांत सोइतकर (एसोसिएट डायरेक्टर और एक्टर), अतुल महाले (डॉ प्रकाश आमटे और पिपसी फेम), श्रीराम जोग (अक्षय कुमार की पैड मैन में उनके बिजनेस पार्टनर), गणेश देशमुख (नागराज मंजुले की नाल) नागपुर, विदर्भ और मध्य भारत के पचास से ज्यादा प्रतिभाशाली कलाकारों को अपनी कला दिखाने का मौका मिला है. फिल्म के लिये नागपुर के फेमस पेंटर बिजय बिस्वाल ने पेंटिंग्स बनाई है.
इस फिल्म में मुख्य भूमिकाएं, संजय मिश्रा, प्रियंका बोस, तनिष्ठा चटर्जी, सोनमणि जयंत और बरुन चंदा ने निभाई है.

- संदीप अग्रवाल 

 

Facts File

Rakkosh

 

Rakkhosh is India’s 1st complete POV film.

Rakhosh is a film where the camera is the lead character of the film.

Rakkhosh is one of the few films with its story based in a Mental Asylum.

Rakkhosh is a first-person POV of a schizophrenic person.

Rakkhosh is based on a Marathi Language short story “Patient No. 302″ by Late Shri Narayan Dharap. He who is a well-known writer in Marathi Literature in horror genre, on whose another story “Tumbbad” was based.

Patient No. 302 is written in first person from which the idea to make the film is 1st person POV came in place.

Due to POV treatment, the 4th wall is completely eliminated. It is another unique treatment where everyone is talking to a camera, whereas actors are always trained to ignore camera.

Namit Das of “Sumit Sab Sambhal Lega”,”Patakha” and “Sui Dhaga” fame has lent the voice to the character, “Birsa”, from whose POV the film is.

Till now most of the films used POV partially or are of found footage genre. 1st Complete POV film “Hard Core Henry” was shot as a 1st person shootout gameplay. All POV films are shot via small cameras are go pro till now. We first time used proper cinema camera (Red Dragon 6K) to shoot POV.

We had to create a custom POV rig for Red camera 1st time in India and maybe 2nd time in the world.

The film is shot by a french DOP Basile Pierrat who had done one music video named “Varanasi” in POV treatment.

The lead character being schizophrenic and having the film in POV, the idea was to put the audience inside the head of a schizophrenic person so that they get a first-hand experience of what all goes in the mind of a person who is suffering this illness.
Though the film is genre agnostic as it is essentially an emotional drama at the base of it, with various aspects of who-done-it murder mystery, psychological thriller, horror, paranormal. If we are needed to categorise it, we will call it India’s 1st Complete POV Paranormal Psychological Thriller.

Though prima-facia the film is a who done it a murder mystery which will be enjoyed by every type of audience, it has multiple layers to it. The 2nd layer is of emotional connect between a brother and a sister, a mother and a son, between 2 friends and also within asylum inmates. The 3rd layer is where it speaks about the social stigma attached to the mental illness, highlights the conditions of over-stressed asylum staff, creates awareness about the need to treat these patients with compassion and care. 4th layer is a subtle discussion about evil and good which a cinephile will enjoy.

The film has 5 very good songs which come as part of the narrative.

yes(0)no(0)
Filed in: Cinema, Khabar Next

You might like:

एशिया की पहली इनोवेशन गैलरी 26 अप्रैल से एशिया की पहली इनोवेशन गैलरी 26 अप्रैल से
अलीगढ़ Express अलीगढ़ Express
सोनभद्र  Express सोनभद्र Express
संघर्ष से होकर जाती है सफलता की राह…. संघर्ष से होकर जाती है सफलता की राह….
© 2019 A touch of tomorrow !. All rights reserved. XHTML / CSS Valid.
Proudly designed by Theme Junkie.