बिना पढ़ाई के फीस ?

इस सप्ताह विभागीय शिक्षण उपसंचालक द्वारा सभी स्कूलों को फीस विषय में जो आदेश दिया गया है वो दिशाभ्रमित करने वाला व गोलमोल है। इस आदेश में विभागीय शिक्षण उपसंचालक ने सभी स्कूलों को पत्र लिखकर सूचित किया है कि वे पालको पर फीस को ले कर सकती न करे तथा बकाया फीस के लिए उन्हें किस्त दी जाये तथा नए शैक्षणिक वर्ष में फीस में कोई इजाफा नहीं किया जाये। इस प्रकार का दिशाहीन और भ्रामक आदेश निकल कर विभागीय शिक्षण उपसंचालक पालकों के जख्मों पर नमक छिड़क रहा है और पक्षपातपूर्ण ढंग से स्कूल संचालकों को मदद कर रहा है।

ऐसे समय में, जब पूरा देश कॅरोना महासकट के कारण अपने घरों में कैद है और लोगों को आजीविका चलाना भी भारी पड़ रहा है, इस प्रकार का आदेश पालको के हितों के खिलाफ है। भारतीय अर्थव्यस्था पूरी तरह चौपट हो चुकी है ऐसे समय पालको को सरकार से बड़ी राहत की आवश्यकता है। विदर्भ पेरेंट्स एसोसिएशन ने माँग की है कि लॉकडाउन के दौरान छात्रों की 3 माह की फीस माफ़ की जाये तथा शैक्षणिक वर्ष 2020—21 की स्कूलों की फीस में 50% छूट दी जाए तथा पाठक्रम व स्कूल गणवेशो में इस वर्ष कोई भी बदलाव नहीं किया जाए. इस माँग से सभी स्कूल संचालक व शिक्षण विभाग की भृकुटियां तन गई हैं. बढ़ते विरोध व पालको को संघठित होता देख स्कूल संचालको ने शिक्षण विभाग के साथ मिलकर ऐसा आदेश निकाल कर पालको को गुमराह करने की कोशिश की है। हम अपनी इस माँग पर अडिग हैं कि छात्रों की 3 माह की फीस माफ़ की जाये तथा शैक्षणिक वर्ष 2020—21 की स्कूलों की फीस 50% कम की जाए और साथ ही पाठक्रम व स्कूल गणवेशो में इस वर्ष कोई भी बदलाव स्वीकार नहीं किया जाएगा. हमने इस आशय का ज्ञापन मुख्यमंत्री व शिक्षण मंत्री को ईमेल द्वारा भेजा है जो अभी विचाराधीन है। सभी स्कूले ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर ढोंग कर रहे है। हम सभी पालको से अपील करते हैं कि वे संगठित हो कर इसका विरोध करें। अभी तक शिक्षा कारोबारियों ने पालको से करोड़ो रुपए कमाए हैं, अतः ये उनकी नैतिक जवाबदारी है की इस घडी में वे पालको को राहत प्रदान करें। हमारी माँग है कि जब तक राज्य सरकार पालको के ज्ञापन पर कोई फैसला नहीं लेती तब तक पालको से फीस के नाम पर कोई भी प्रकार की वसूली न की जाये।

( ये लेखक के निजी विचार हैं. संदीप अग्रवाल विदर्भ पैरेंट्स एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष हैं)

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