कमान से निकला तीर…

जोश में आकर ट्वीट कर देना और फिर बाद में विवाद होने पर उसे अकाउंट से हटा देना…बहुत सारे नेता-अभिनेता या दूसरे क्षेत्रों के मशहूर लोग आए दिन ऐसा करते रहते हैं. और तब भी बात न बने तो बोल देते हैं कि फलां ट्वीट या पोस्ट मैंने नहीं की है, बल्कि किसी ने मेरा अकाउंट हैक करके इसे अंजाम दिया था.

पाँच—छह साल पहले की बात है, खुद ट्विटर के चीफ फाइनेंस ऑफिसर एंथनी नोटो तक अपने ही ट्वीट के चलते ही अजीब स्थिति में फंस गए थे, उन्होंने गलती से एक ऐसा निजी संदेश ट्वीट कर दिया , जो संभवतः किस कंपनी के ट्विटर द्वारा संभावित अधिग्रहण के बारे में उनके किसी मातहत कर्मचारी के लिए था. इसमें नोटो कह रहे थे कि ‘‘ मैं अब भी सोचता हूं कि हमें उसे खरीदना चाहिए. वह आपके शेड्यूल में है. हमें उन्हें बेचने की जरूरत होगी. मेरे पास एक प्लान है.’’
उनके यह ट्वीट करते ही इसे तुरंत ही डिलीट भी कर दिया गया था, लेकिन तब तक इस ट्विटर हैंडल के 8700 फॉलोअर्स में से कई इसका स्क्रीन शॉट सेव कर चुके थे. जाहिर है इसे डिलीट करके इसके अस्तित्व को ही नकार देना किसी के लिए भी संभव नहीं था.

जिंदगी चाहे रीयल हो या वर्च्युअल, यह कहावत इसके साथ हमेशा लागू होती है कि कमान से निकला तीर और जुबां से निकली बात वापस नहीं आते. यह अकेले में किसी कागज पर पेंसिल से खींची गई लकीर नहीं है, जिसे तुरंत रबर से रगड़कर मिटाया जा सके. 

जुबां से बात निकलती है तो, अगर उसे किसी कैमरा या टेपरिकॉर्डर में कैद नहीं किया गया है, उससे मुकरना मुश्किल होता है, पर नामुमकिन नहीं. लेकिन, सोशल मीडिया पर कहने और मिटाकर मुकरने के कोशिश के बीच के चंद ही सेकेंड में वह टेराबाइट्स की रफ्तार से सारी दुनिया में फैले आपके सैकड़ों-हजारों फालोअर्स और उनकी शेयरिंग, रिट्वीटिंग के जरिए लाखों लोगों तक पहुंच जाती है…और आपके या किसी के भी साथ जो कुछ बुरा होना होता है, उसके बीज पड़ जाते हैं.
इस आभासी दुनिया में आपके सारे फैन, फ्रेंड्स या फालोअर आपके हितचिंतक या दोस्त नहीं होते, उनमें से कई आपसे खार खाने वाले, आपकी जड़े खोदने के लिए आपकी किसी एक गलती की ताक में घात में लगाकर बैठे छिपे दुश्मन भी हो सकते हैं. उनसे आपको सिर्फ आप ही बचा सकते हैं. चाहे अपनी वाल पर की गई पोस्ट हो या किसी की पोस्ट पर कमेंट, ट्वीट हो या लाइक या शेयर…वर्च्युअल दुनिया में सब कुछ ऑन रिकॉर्ड रहता है, मिट जाने के बाद भी, इसलिए यहाँ छाछ की हर घूंट को फूंक-फूंक कर पीना जरूरी है, और इसके लिए दूध से मुंह जलने का इंतजार करना जरूरी नहीं है.

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