फिर जाएंगे चांद पर

मानवरहित चंद्रयान के जरिए चंद्रमा पर अपनी सशक्त मौजूदगी दर्ज कराने के बाद भारत एक बार फिर चांद पर जाने की तैयारी कर रहा है.  सूत्रों के मुताबिक चंद्रयान-II को अगले साल तीन जनवरी को लांच करने की तैयारी की जा रही है.  1947 में स्थापित अंतरिक्ष विभाग की एक इकाई फिजिकल रिसर्च लेबोरेट्री (पीआरएल),अहमदाबाद ने भारत के दूसरे चंद्रमा मिशन चंद्रयान-2 के लिए तीन पेलोड विकसित किए है, जिनमें एक ऑर्बिटर, एक लैंडर और एक रोवर होगा.

‘लैंडर पर चैस्ट यानी ‘चंद्राज सरफेस थर्मोफिजिकल एक्सपेरिमेंट’ होगा, जो चांद की सतह के नीचे जाकर तापमान मापेगा. यह लैंडर के चंद्रमा की सतह पर उतरने के बाद काम करेगा. लैंडर के उतरने के बाद रोवर उससे निकलेगा और सतह पर इधर-उधर घूमेगा. इसके लिए पीआरएल ने एक विशेष उपकरण विकसित किया है, जिसका नाम ‘अल्फा पार्टिकल एक्सरे स्पेक्ट्रोमीटर’ है. इसका डिजाइन चांद की सतह पर मौजूद विभिन्न तत्वों और रासायनिक यौगिकों की पहचान के लिए किया गया है.

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ज्ञातव्य है कि चंद्रयान प्रथम , आज से दस साल पहले 22 अक्टूबर 2008 को चांद पर भेजा गया था और इसी के साथ भारत चांद पर यान भेजने वाला दुनिया का छठा देश बन गया था. निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार इसे दो वर्ष तक चंद्रमा पर ही रहना था, लेकिन नियंत्रण कक्षा से संपर्क टूट जाने के कारण इसे 14 माह बाद ही बंद कर दिया गया.इसे भेजने का उद्देश्य चंद्रमा की सतह के विस्तृत मैप, वहां पर पानी और हीलियम की तलाश करना था. बेशक यह अपेक्षानुरूप सफल नहीं रहा, लेकिन इससे भारत के लिए चंद्रमा व मंगल आदि ग्रहों पर यान भेजने का रास्ता खुल गया था.

चंद्रयान-प्रथम की सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि इसके जरिए भारत चंद्रमा पर पानी की प्रामाणिक मौजूदगी का दावा करने वाला वाला पहला देश बन गया. चंद्रयान यह पता लगाने में सफल रहा कि चंद्रमा पर जो पानी है वह समुद्र, नदियों या झीलों आदि के रूप में नहीं, बल्कि चट्टानों की सतह पर मौजूद है और उसकी मात्रा पहले के सभी अनुमानों से कई गुना ज्यादा है.

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