विलुप्त हो जाएंगी भाषाएं

इस बहुरंगी संसार को विविधता देने वाली अनेक चीजों में एक है हमारी भाषा. लेकिन, ग्लोबलाइजेशन और मार्केटप्रधान संस्कृति के प्रभुत्व ने हमारी भाषाई विविधता को बहुत क्षति पहुंचाई है. विकास की कीमत इंसान को अपनी अनेक मातृभाषाओं के रूप में चुकानी पड़ रही है.

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यूनेस्को की रिपोर्ट ‘एटलस आफ वर्ल्ड लैंग्वेज इन डेंजर ऑफ डिसअपियरिंग’ के अनुसार, भारत ऐसे राष्ट्रों की सूची में शीर्ष पर है जहां अधिकतर बोलियां समाप्ति के कगार पर हैं. जो एक ऐसे देश के रूप में जाना जाता है, जो बहुभाषी संस्कृति का प्रतीक रहा है.

नेशनल जियोग्राफिक सोसाइटी और लिविंग टंग्स इंस्टीट्यूट फॉर एंडेंर्जड लैंग्वेजेज का दावा है कि प्रत्येक पखवाडे. एक भाषा की मृत्यु हो रही है. यह चिंताजनक है. विलुप्तिकरण के कगार पर पहुंची भाषाओं में ज्यादातर जनजातीय भाषाएं हैं, जो उपेक्षा की शिकार होकर अपना अस्तित्व खो रही हैं. एक अनुमान के मुताबिक भारत में करीब 196 भाषाओं पर दुनिया के नक्शे से ही समाप्त होने का खतरा मंडरा रहा है.

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