जुपिटर पर जीवन की तलाश

हमारे सोलर सिस्टम में अर्थ के बाद अगर किसी प्लेनेट पर जीने के लिए सबसे उपयुक्त परिस्थितियां पाए जाने की उम्मीद की जाती है तो वह है, जुपिटर यानी बृहस्पति का सेटेलाइट यूरोपा. अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा इस उपग्रह पर जीवन की खोज के लिए 2020 के मध्य तक एक लैंडिंग प्रोब भेजने की योजना बना रही है.

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यूरोपा मिशन का मुख्य जोर इस बर्फीले उपग्रह की विशेषता का पता लगाना है, वहीं अंतरिक्ष एजेंसी उस पर एक छोटा उपकरण उतारने की योजना पर भी काम कर रही है. नासा के साइंटिस्ट्स के मुताबिक, वे लैंडर जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. जिससे सतह की भी जांच की जा सके. जांच में यूरोपा के अध्ययन के लिए नौ विभिन्न तरीकों का प्रयोग किया जाएगा, जिसमें हाई रेजोल्यूशन कैमरा, हीट डिटेक्टर और बर्फभेदी रडार का भी प्रयोग किया जाएगा.

यूरोपा बर्फ की संभवतः 80 किलोमीटर मोटी परत से ढंका हुआ है. माना जाता है कि इसके करीब 20 किलोमीटर नीचे एक विशाल सागर है. इस तरह के सागरीय क्षेत्र, सोलर सिस्टम के कम से कम पांच अन्य चंद्रमाओं में हैं.

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