कोरोना काल में ‘काम’

बहुत साल पहले, मनमोहन सरकार में हेल्थ मिनिस्टर रहते हुए वरिष्ठ कॉन्ग्रेसी नेता गुलाम नबी आजाद ने एक बयान दिया था कि भारत में आबादी बढ़ने की सबसे बड़ी वजह यही है कि यहाँ मनोरंजन के साधनों की बहुत कमी है. हालांकि अर्थशास्त्र में भी यही कहा गया है कि ऐसे देशों की आबादी अपेक्षाकृत तेजी से बढ़ती है, जहाँ मनोरंजन के साधन कम होते हैं. लेकिन, आजाद की इस बात ने लोगों का काफी मनोरंजन किया और वे उपहास का विषय बन गए.

Image Courtesy : Lumapoche ( Pixabay)

अब कोरोना काल में उनकी यह बात सही हो रही है कि किस तरह फुरसत में सेक्स लोगों के लिए एक जैविक जरूरत से ज्यादा मनोरंजन का विषय होता है. इसके लिए दो बातों का उल्लेख किया जाना चाहिए. एक, पिछले दिनों में ​महिला सहायता हेल्प लाइनों पर ऐसी शिकायतें बड़ी संख्या में आई हैं, जिनमें महिलाओं ने कहा है कि वे अपने पतियों की सेक्स की ओवर डिमांड से बहुत परेशान हैं. और दूसरी ये कि, लॉकडाउन के बाद सेक्स टॉयज की बिक्री में 65 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. दिलचस्प बात यह है कि सेक्स प्रॉडक्टस की बिक्री के मामले में महाराष्ट्र, तमिलनाडु सरीखे जो राज्य टॉप पर हैं, कोरोना संक्रमितों की संख्या के मामले में भी वही राज्य टॉप पर हैं. यही हाल शहरों का है. पहले स्थान पर मुंबई है और दूसरे पर बंगलौर और तीसरे पर दिल्ली…

हालांकि आज मनोरंजन के साधनों का इतना अभाव नहीं है, जितना दस साल पहले था, जब आजाद हेल्थ सँभालते थे. आबादी बढ़ने की उनकी थ्यौरी कितना सही साबित होती है, यह तो जनवरी 2021 के बाद से पता चलना शुरू होगा, लेकिन यह तय है कि कोरोना के डर और सेक्स की भूख में कोई न कोई गहरा रिश्ता जरूर है.

मनोवैज्ञानिकों का भी कहना है कि सेक्स एक नेचुरल ट्रेंक्वेलाइजर है. वे सलाह देते हैं कि अगर आप बहुत ज्यादा चिंतित और तनावग्रस्त हैं तो सेक्स जरूर करें. पार्टनर नहीं है तो आत्मनिर्भर बनें. तो इसलिए हो सकता है कि मामला सिर्फ मनोरंजन का ही न हो. वैसे भी भारतीय दर्शन में काम को जीवन के चार प्रमुख उद्देश्यों में तीसरे स्थान पर रखा गया है, जिसके बाद मोक्ष आता है.

सेक्स की इस बढ़ती चाह की भर्त्सना करने के बजाए, सिर्फ यही सोचिए कि ये वो लोग हैं, जो नहीं चाहते कि कोरोना की वजह से सीधे चौथे लक्ष्य को प्राप्त कर लें, इ​सलिए मोक्ष से पहले वे ‘काम’ का आनंद ले रहे हैं और ‘कोरोना’ को ‘करो ना’ में बदल कर इस महामारी को मात देने की अनूठी मुहिम का हिस्सा बने हुए हैं.

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