एशिया की पहली इनोवेशन गैलरी 26 अप्रैल से

राजीव गाँधी राष्ट्रीय बौद्धिक संपदा व प्रबंधन संस्थान (आरजीएनआईआईपीएम), नागपुर में एक ऐसी इनोवेशन गैलरी आरंभ होने जा रही है, जिसमें देश भर के इनोवेटर्स और युवा वैज्ञानिकों को न सिर्फ अपनी खोजों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने का मौका मिलेगा, बल्कि ऐसे इन्वेस्टर्स के संपर्क में आने का भी अवसर प्राप्त होगा, जो उनकी खोज में निवेश के इच्छुक हो सकते हैं और उन्हें आगे बढ़ने में काफी बडी मदद कर सकते हैं.

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आरजीएनआईआईपीएम में ट्रेनिंग काॅर्डिनेटर सारंग पाटिल ने बताया कि वैसे तो इस गैलरी का औपचारिक उद्घाटन पिछले महीने आठ मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में किया गया था, लेकिन 26 अप्रैल से इसे नियमित रूप से संचालित किया जाएगा, जिसमें इनावेटर्स अपनी बनाई चीजें या उनके प्रोटोटाइप तीन महीने तक प्रदर्शित कर सकते हैं. यह गैलरी माह के हर दूसरे व चौथे शुक्रवार को शाम चार से छह बजे तक खुली रहेगी, जिसमें संभावित इन्वेस्टर्स, इनोवेटर्स से मिलकर उनके उपक्रमों के बारे में चर्चा कर सकेंगे और उनके साथ व्यावसायिक संबंध भी स्थापित कर सकेंगे.

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रेडी टू इनोवेशन वर्ल्ड वाइड फोरम और आरजीएनआईआईपीएम के सौजन्य से आरंभ हो रही इस गैलरी में बौद्धिक संपदा कानून में रजिस्टर्ड डिजाइन, इनोवेशन, पेंटिंग, साहित्यिक और अन्य रचनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा. श्री पाटिल ने बताया कि इसमें किसी भी उम्र या क्षेत्र के इनोवेटर्स अपनी खोजों का प्रदर्शन कर सकते हैं, क्योंकि इनोवेशन का उम्र से कोई संबंध नहीं है. लेकिन, गैलरी में प्रदर्शित होने वाली प्रत्येक खोज का पेटेंट होना या कम से कम पेटेंट के लिए एप्लिेशन फाइल होना आवश्यक है. यह सुविधा एकदम निःशुल्क है और इसके लिए 15 से 25 अप्रैल के बीच आवेदन जमा किए जा सकते हैं.

उन्होंने बताया कि आठ मार्च को उद्घाटन वाले दिन, गैलरी में करीब 45 इनोवेटर्स ने एग्रीकल्चर, इंडस्ट्रियल, टेक्निकल आदि क्षेत्रों से संबंधित अपने माॅडल या प्रोटोटाइप प्रदर्शित किए थे, जिन्हें काफी सराहा गया था. इसके नियमित संस्करण में इस संख्या के और ज्यादा बढ़ने की आशा की जा रही है.

मिनिस्ट्री आॅफ काॅमर्स एंड इंडस्ट्री के अंतर्गत संचालित आरजीएनआईआईपीएम देश का एकमात्र ऐसा संस्थान है, जो पिछले कई सालों से बौ़िद्धक संपदा संबंधित अधिकारों के प्रति जागरूकता व मार्गदर्शन के लिए नियमित रूप से अल्पावधि प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है. श्री पाटिल ने बताया कि इस पाठ्यक्रम को करने के बाद प्रशिक्षणप्राप्तकर्ता न सिर्फ अपने पेटेंट फाइल करने में आने वाले खर्च में तीन चैथाई से ज्यादा बचत कर सकते हैं, बल्कि इसे करने के बाद एक पेटेंट एजेंट के रूप में उनके लिए एक नया कैरियर वेन्यू भी खुल जाता है. उन्होंने बताया कि संस्थान में इस पाठ्यक्रम को प्रमाणपत्र, डिप्लोमा और डिग्री पाठ्यक्रम के रूप में विस्तारित किए जाने की दिशा में काम किया जा रहा है.

(For further details, contact: Mr Sarang Patil – 9922453057 / 9224425777)

By Sandeep K. Agrawal from Nagpur (M.S.)

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