लगेगा गन पर बैन?

sandeep-2015अमेरिका के स्कूलों में हर साल दो से तीन घटनाएं ऐसी होती हैं, जब कोई सिरफिरा स्टुडेंट या साइको किलर गन लेकर आता है और अंधाधुंध गोलियां बरसाकर बेगुनाह लोगों को मौत के घाट उतारकर चला जाता है. यह समस्या कितनी विकट और कितनी विराट है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 11 सितंबर 2001 के डब्ल्यूटीटी आतंकी हादसे के बाद के सोलह सालों में अब तक ऐसी 400 से ज्यादा घटनाएं हो चुकी हैं. अकेले इसी साल स्कूलों में 20 बार फायरिंग हुई है. इन घटनाओं में ज्यादातर का निशाना स्कूल थे.

हर कोई चाहता है कि यह सिलसिला रुके, लेकिन हर कोई यह भी जानता है कि यह काम इतना आसान नहीं है. तीन साल पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा तक इसे काबू करने के मामले में इतने बेबस साबित हुए थे कि उनकी आँखों में आँसू आ गए. लेकिन, सीनेट तब भी नहीं पसीजी. अलबत्ता उनकी बेबसी का एक असर यह जरूर हुआ कि अमेरिका में ही नहीं, बल्कि दूसरे कई देशों में गन कंट्रोल को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ी है, और फरवरी मध्य में फ्लोरिडा के एक स्कूल में हुई फायरिंग में 17 बच्चों की मौत के बाद तो यह मांग काफी जोर पकड़ चुकी है. इसका सबूत है, कल वाशिंगटन में निकाला गया, दुनिया का सबसे अब तक का सबसे बड़ा मोर्चा, जिसमें पांच लाख से ज्यादा लोगों ने हिस्सा लिया. इस अभूतपूर्व मार्च में राजधानी ही नहीं, बल्कि अमेरिका भर में सात सौ से अधिक प्रदर्शन हुए. यही नहीं, इस मसले पर दुनिया के 100 से ज्यादा गैरअमेरिकी शहरों में भी बंदूक पर नियंत्रण के पक्ष में प्रदर्शन किए गए, जिनमें लंदन, टोकियो, मुंबई, सिडनी जैसे शहर प्रमुख हैं.

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यूएस के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भी गन कंट्रोल के मामले में सख्त हैं, लेकिन दूसरे कई मसलों की तरह इस मामले में भी उनका तरीका अतिवादी ही है, इसीलिए वे इस तरह की घटनाओं से मुकाबले के लिए हर टीचर के हाथ में बंदूक थमाने की बात करते हैं. शायद वह भी जानते हैं कि अमेरिका की गन निर्माता लाॅबी के दबाव में काम कर रहे अमेरिका के पाॅलिसी मेकर्स को इस मामले में राजी करना आसान नहीं होगा. यहाँ का गन कारोबार करीब ढाई लाख करोड़ डाॅलर का है, जो प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से करीब दो लाख पैंसठ हजार लोगों को रोजगार दे रहा है.

ऐसे देश में जहाँ गन एक संस्कृति है, लोगों के हाथ से उसे छीनना आसान नहीं होता. लेकिन बचाव के नाम पर जिनके पास गन नहीं है, उनके हाथ में एक और गन थमा देना इस संस्कृति को कैसे हतोत्साहित करेगा. इस समस्या के उपचार के लिए एक लंबी इलाज प्रक्रिया की जरूरत है, जिसमें कानूनी, मनोवैज्ञानिक और शैक्षणिक सभी विधियों का समावेश हो. लोग दूसरों के दर्द को अपना समझेंगे तभी उन्हें महसूस होगा कि बंदूक के ट्रिगर पर उंगली भले ही एक हो, लेकिन वह शिकार बहुत सारे लोगों का करती है, और इन बहुत सारे लोगों में कोई उनका अपना भी हो सकता है.

संदीप अग्रवाल
एडिटर-इन-चीफ

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