कोरोना कॉन्सपिरेसी!

पिछले करीब एक महीने से कोरोना वायरस की दहशत ने न केवल इसके ओरिजिन कंट्री चीन, बल्कि लगभग सारी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है. हर रोज अलग—अलग जगहों से इसके संदिग्ध या पुष्ट रोगियों की खबरें आ रही हैं, जो दहशत को और गहरा रही हैं. हालांकि यह पहली बार नहीं है, जब किसी वायरस या बीमारी को लेकर इस तरह के व्यापक भय का माहौल बना हो, लेकिन अबकी बार कुछ ऐसी नई चीजें सामने आने की आशंकाए हैं, जो चिंता को बढ़ा सकती हैं.

चिंता का पहला कारण है, वुहान के एक हॉस्पिटल से ‘बाहर’ आए इस वायरस को  लेकर चीन का व्यवहार. सबसे पहले वहाँ की सरकार ने इसकी मौजूदगी और प्रसार के खतरे के प्रति आगाह करने वाले व्हिसलब्लोअर डॉक्टर ली वेनलिआंग, जिनकी चार दिन पहले इसी वायरस के संक्रमण के चलते मौत हो गई है, की आवाज को दबाने की कोशिश. इसके बारे में कहा गया कि चीनी सरकार दुनिया में चीन की छवि खराब होने से बचाने के लिए ऐसा कर रही थी.

इसके बाद ऐसी खबरें आ रही हैं कि चीन ने निहायत ही एक्स्ट्रीम स्टेप उठाते हुए कोर्ट से कोरोना संक्रमित बीस हजार लोगों को मारने की इजाजत माँगी है. हालांकि चीन की ओर से इसे एक अफवाह बताया गया है और कहा गया है कि वहाँ की सरकार अपने नागरिकों को बचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस बीमारी से मजबूती के साथ लड़ रही है. गौरतलब है कि चीन में अब तक चालीस हजार लोगों के कोरोना संक्रमित होने की आशंका है. 900 से ज्यादा लोग अब तक इस वायरस की वजह से अपनी जान गंवा चुके हैं.

वायरस, संक्रमण, बीमारी और मौतों की रूटीनी खबरों के बीच एक नई चीज सामने आई है, जो अगर सही है तो बेहद भयावह है और कोरोना को लेकर चीन की चिंताओं के पीछे के सच को बयां करने वाली है. कहा जा रहा है कि चीन ने यह वायरस अमेरिका में फैलाने के लिए बनाया था, लेकिन गलती से यह लैब में ही लीक हो गया और खुद चीन को ही अपनी गिरफ्त में ले लिया. और चीन की फिक्र बीमारी को लेकर कम, अपनी इस मंशा को संदेह की मिट्टी में दफन करने की ज्यादा है. क्योंकि अगर यह बात साबित हो गई कि चीन का इरादा वाकई में यही था, जैसी कि अटकलें लगाई जा रही हैं तो पूरी विश्व बिरादरी उसके खिलाफ हो जाएगी और इस समय वैश्विक व्यापार के बूते आर्थिक महा​शक्ति बना हुआ चीन जैसा देश इस डैमेज को अफोर्ड नहीं कर सकता.

रासायनिक युद्ध के खतरों को लेकर भविष्यविद् दशकों से दुनिया को आगाह करते आ रहे हैं, लेकिन किसी ने यह उम्मीद नहीं की थी कि यह हकीकत के रूप में भी सामने आ सकता है. कोरोना की वजह से दुनिया में गहमागहमी मच गई है और विश्व ​के प्रमुख देशों ने सोचना शुरू कर दिया है कि अगर वाकई ऐसा हो गया तो क्या वे इस स्थिति का सामना करने के लिए तैयार हैं.

यूं तो पहले भी कई बार किसी बीमारी या वायरस के फैलने के पीछे किसी कॉन्सपिरेसी के होने की अटकलें लगाई जाती रही हैं, लेकिन अभी तक इसके लिए सिर्फ मेडिकल लॉबी और मल्टीनेशनल दवा कंपनियों को टार्गेट किया जाता था कि वे अपने मुनाफे के लिए इन्हें बढ़ावा देते हैं. लेकिन अगर चीन पर किया जा रहा शक साबित होता है तो कोरोना पूरी दुनिया के लिए एक अलार्म बेल बन सकता है.

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