बिग बी, बिग ड्रामा

अमूमन विनम्रता और भद्रता की प्रतिमूर्ति नजर आने वाले, बॉलीवुड के ब्रह्मा माने जाने वाले अमिताभ बच्चन, जिन्हें सुपरस्टार, मेगास्टार, सदी के महानायक, बिग बी जैसी न जाने कितनी उपाधियों से नवाजा जा चुका है, को उन्हें चाहने वाले लोगों ने जो ईश्वरत्व प्रदान किया है, वह इस उम्र में उनसे ढोया नहीं जा रहा है.

कई बार लोग भूल जाते हैं और कई बार वे स्वयं भी, कि वे कुछ भी होने से पहले एक इंसान भी हैं और एक इंसान बहुत सारी चीजें महसूस भी कर सकता है और अभिव्यक्त भी. इस चक्कर में कई बार उनकी बेवजह फजीहत हो जाती है. एक बार फिर हो रही है, जब किसी ट्रोलर ने ट्विटर पे उनके मर जाने की कामना की और वे भड़क उठे और उस पर मोहल्ला शैली में हल्ला बोलते हुए उसकी तुलना उतने राक्षसों से कर डाली, जितनों के उन्हें नाम याद आए होंगे. उन्होंने उस अनाम ट्रोलर पर उसे अपने पिता का पता न होने की तोहमत लगाई और तब भी मन नहीं भरा तो ठोंक दो सालों को जैसे आह्वान तक कर डाले.

हालांकि भड़के तो वे पहले भी कई बार हैं. एक बार कबीर वेदी की दूसरी बीवी निकी वेदी के शो में दाढ़ी पर किए गए मजाक से वे इतना विचलित हो गए कि शो छोड़कर चल दिए और कहा जाता है कि उन्हें मनाने के लिए स्टार प्लस को निकी का शो बंद कर, उसे बाहर का रास्ता दिखाना पड़ा. ऐसे ही एक अवार्ड फंक्शन में वह इस बात से खफा होकर उठकर चल दिए थे कि उन्हें शाहरूख से पीछे वाली कतार में क्यों बिठाया गया है.

गुस्सा करना​ बिग बी का हक है, बढ़ती उम्र और बढ़ती बीमारियों से उपजे चिड़चिड़ेपन और अवचेतन में फैल रहे अहंकार की वजह से इसे जायज भी कहा जा सकता है, लेकिन जब आप इमेज के शेर पर सवार होते हैं तो आपको बहुत सावधानी बरतनी पड़ती है क्योंकि आप जानते हैं कि वह आपके गिरते ही आपको खा जाएगा. यहाँ वह चूक गए और आलोचकों के निशाने पर आ गए हैं. उन्हें दैवतुल्य मानने वाले 9 करोड़ प्रशंसकों की फौज उनके इस व्यवहार और ऐसे शब्दों से सकते में आ गई है. यह वही व्यवहार है, जिसे पर्दे पर दिखाते हुए उन्होंने सदी के महानायक बनने तक का सफर तय किया है, लेकिन रीयल लाइफ में किसी ने उनसे यह उम्मीद नहीं की थी.

यह उनके व्यक्तित्व की विवशता भी है और विसंगति भी कि वे हमेशा गुड़ खाए, गुलगुलों से परहेज वाली स्थिति में ही रहते हैं. रोज सोशल मीडिया पर अपना रोजनामचा बखान करते हैं, जब बात बिगड़ने लगती है तो अपनी निजता के अधिकार का हवाला देते हुए मीडिया से बख्श देने की अपील करते हैं. वर्ना क्या वजह है कि जब कोरोना संक्रमितों की पहचान गुप्त रखने का ध्यान रखा जाता है, उनके और उनके परिवार के संक्रमित होने से जुड़ी पल—पल की खबर मीडिया में आ रही है.

बच्चन जी, अगर आप चाहते हैं कि लोग आपके बारे में बातें न करें तो सबसे पहले आप खुद वर्च्युअल चौराहों पर अपने बारे में बातें करना बंद कीजिए. आपको आपकी प्रतिभा और आपके काम ने लोगों का चहेता बनाया है, न कि आपके निजी जीवन की जानकारियों के प्रसार ने. आपको अब प्रसिद्धि की नहीं, बल्कि मानसिक शांति की जरूरत है, इसलिए आप शांति से काम करते रहिए और जब काम न हो तो आराम कीजिए.

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