2095 में कम्प्लीट होगी जेंडर इक्विलिटी

आलमोस्ट सभी सेक्टर्स में जेंडर इक्विलिटी का काॅन्सेप्ट रीयल शेप ले रहा है, फिर भी वर्कप्लेस पर जेंडर डिस्क्रिमिनेशन को पूरी तरह एलिमिनेट होने मे अभी करीब आठ दशक लग सकते हैं.

gender gap

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ)  ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट  के अकाॅर्डिंग, बीते एक दशक में यह गैप थोड़ा सा ही डिक्रीज हुआ है. हैल्थ और एजुकेशन जैसे बहुत से सेक्टर्स में यह गैप तेजी से घट रहा है. महिलाओं का इकोनॉमी में पार्टिसिपेशन बढ़ा है और पुरुषों के कम्परीजन में उनके लिए अपर्च्युनिटीज भी 56 % से बढ़कर 60 % तक पहुंच चुकी हैं.

142 देशों को कवर करने वाली इस रिपोर्ट के अकाॅर्डिंग अभी भी महिलाओं को बराबरी के लिए एक लंबा सफर तय करना बाकी है. मौजूदा हालात के बेस पर बाकी सभी चीजें समान रहती भी हैं तो भी दुनिया इस गैप को 2095 तक ही पूरी तरह मिटा पाएगी.

 फैक्ट्स
*लगभग सभी देशों ने हेल्थकेयर सुविधाओं तक पहुंच के मामले में गैप को कम करने के लिए पूरी तरह से काम किया है.
*35 देशों ने इसे पूरी तरह से समाप्त कर दिया है.
* 25 देशों ने एजुकेशन तक पहुंच का अंतर को मिटाया है.
*जेंडर इक्वलिटी के लिहाज से उत्तरी यूरोप के पांच देश डेनमार्क, फिनलैंड, आइसलैंड, नॉर्वे और स्वीडन सबसे आगे.
*टॉप 10 में निकारगुआ, रवांडा, आयरलैंड, फिलीपींस और बेल्जियम भी.

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