आ रही है अरिघात

नौ सेना में चार साल तक अकेलेपन के एहसास से गुजर रही भारत की पहली बैलिस्टिक परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिहंत को इस साल के अत तक अपना एक जोड़ीदार मिलने जा रहा है.
इस जोड़ीदार का नाम है आईएनएस अरिघात, जो तीन साल पहले तक अरिदमन के नाम से जानी जाती थी, और जिसे 2017 में बड़े गोपनीय तरीके से वर्तमान नाम के साथ लॉन्च किया गया था. तीन साल के ट्रायल के बाद अब इसे अगले तीन महीनों के भीतर विधिवत तरीके से भारतीय नौसेना में शामिल कर दिया जाएगा.

Image courtesy: Wikipedia

ज्ञातव्य है कि आईएनएस अरिहंत को 2009 में लॉन्च किया गया था और नौ साल लंबे ट्रायल के बाद अगस्त 2016 में नौसेना को सौंपा गया.
आईएनएस अरिघात देश की दूसरी परमाणु पनडुब्बी है, जिसका निर्माण विशाखापट्नम के शिपबिल्डिंग सेंटर में ऐडवांस्ड टेक्नोलॉजी वेसल (एटीवी) प्रोजेक्ट के तहत किया गया है.
प्रेशराइज्ड वाटर रिएक्टर के जरिए चलने वाली अरिघात, जिसमें सात ब्लेड वाले प्रोपेलर लगे हैं. 6,000 टन वजनी और 112 मीटर लंबी अरिघात समुद्र की सतह पर 12-15 नॉटिकल मील और गहराई में 24 नॉटिकल मील प्रति घंटा तक की गति से चल सकती है. इसमें चार लॉन्च ट्यूब्स हैं और यह अपने साथ 750 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम 12 के-15 सागरिका मिसाइलें या 3,500 किलोमीटर रेंज वाली चार के-4 मिसाइलें,अंडरडेवलपमेंट, ले सकती हैं. यह 80 मेगावाट न्यूक्लियर पॉवर प्लांट से चलती है.

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