आज इम्तेहान का दिन

हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के ‘जनता कर्प्यू’ के आह्वान पर अमल का दिन आज आ पहुँचा है. कोरोना वायरस के खिलाफ एकजुटता का संदेश देने वाले इस दिन का मतलब यह है कि आज पूरे देश के नागरिकों को सुबह सात बजे से रात ग्यारह बजे तक अपने आपको घर में रखना है.

यह कैद नहीं है, बल्कि उस जंग में सहयोग है, जो हमारी सरकार इस विश्वव्यापी महामारी के भारत पर असर को कम से कम करने के लिए लड़ रही है. यह प्रतीकात्मक ही नहीं है, बल्कि व्यावहारिक भी है.

माना जा रहा है कि अगर चौदह घंटे तक देश के सारे इंसान, एक—दूसरे से नहीं मिलेंगे तो यह संक्रमित व्यक्ति तक ही सीमित रहेगा और उसके द्वारा छुई गई चीजों के जरिए दूसरे लोगों तक नहीं पहुँच पाएगा, क्योंकि धातु से बनी चीजों पर इसका जीवनकाल सिर्फ 12 घंटे ही है और जो अपने घर में रहेंगे, वह ऐसी चीजों के संपर्क में नहीं आ सकेंगे. हालांकि शरीर से बाहर यह नौ दिन तक जीवित रह सकता है. इसलिए इस परहेज को अगर अगले दस दिन तक अमल में लाया जाए तो यकीनन इससे एक बहुत बड़ी राहत मिल सकती है.

यहाँ यह भी जानना जरूरी है कि मनुष्य की त्वचा पर यह दस मिनट तक ही जीवित रह पाता है और इसका आकार उसे वहाँ से शरीर के भीतर नहीं जाने देता. यह आँख, नाक, मुँह के जरिए ही शरीर मेें जा सकता है. इसलिए, चेहरा और आँखें ढक कर और हाथों को लगातार साबुन से धोते रहने से इसे शरीर में जाने से रोका जा सकता है.

आज का दिन ब्रेक द चेन का भी दिन है. अगर जाने—अनजाने आप इस चेन का हिस्सा बनने जा रहे हैं तो आज का दिन अपने घर पर रहकर आप बाहरी सतहों पर इसकी मौजूदगी को वहीं का वहीं खत्म कर सकते हैं  और इस चेन को अपने पर ही तोड़ सकते हैं. 

इस बारे में एक बड़ा खूबसूरत सा वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें कुछ तीलियां एक क्यू में खड़ी हैं और एक तीली के जलते ही वह अपने से अगली वाली तीली को जलाने लग जाती है. इसी दौरान बीच से एक तीली निकल जाती है और तीली से तीली दर फैल रही वह आग वहीं रुक जाती है.

आज हम घर पर रहकर इसके अलावा आज ही प्रधानमंत्री महोदय ने जनता से यह भी आह्वान किया है कि वे शाम को पाँच बजे अपने घर के दरवाजे, खिड़कियों और बालकनी में खड़े होकर तालियां और बर्तन बजाएं, ताकि अपनी जान हथेली पर रखकर इसे काबू में करने की लड़ाई लड़ रहे चिकित्साकर्मियों, पुलिसकर्मियों और सफाईकर्मियों की हौसलाआफजाई हो और उन्हें यह अहसास हो कि इस जंग में पूरा देश उनके साथ है.

अफसोस की बात यह है कि हमारे देश में एक बहुत बड़ा वर्ग ऐसा भी है, जो भाजपा विरोध और मोदी विरोध की मानसिकता से ग्रस्त होने की वजह से समस्या की गंभीरता को नकारने पर तुला है. वह प्रधानमंत्री के इस संदेश का मखौल उड़ा रहा है और कह रहा है कि सरकार तालियां बजाकर कोरोना को भगाना चाहती है. लेकिन सुखद बात यह है कि देश की अधिसंख्य आबादी, इन पूर्वाग्रहियों से ज्यादा समझदार और संजीदा है, जो अपने—अपने स्तर पर इससे मुकाबले में अपना योगदान देने में काफी उत्साह का परिचय दे रही है.

अब यह आपको तय करना है कि आप किस ओर हैं? फैसला करने से पहले सिर्फ यह देखें कि वैश्विक आपदा की इस घड़ी में राजनीति ज्यादा जरूरी है या समाज की भलाई…

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